Let There Be Light!!

KUCHHA KAHI, SUNI AUR ANKAHI BAATEIN

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स्थान: Bangalore, Karnataka, India

गुरुवार, मार्च 23, 2006

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है।
करता नहीं क्यूँ दूसरों से बातचीत,
देखता हूँ जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है।

ऐ शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत में तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चर्चा घर-घर में है।
वक़्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमान,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है।
खींच कर लाये हैं सब को कत्ल होने की उम्मीद,
आशिकों का आज ज़ुमघट कूचा-ए-कातिल में है।

बुधवार, मार्च 22, 2006

बस यूँ ही!!

शायद मैने कभी कुछ अच्छे काम किये होंगे तभी मुझे ये सुनहरा मौका मिल रहा है। अब मुझे लगने लगा है कि मै इस पर बडी आसानी से काम कर सकता हूँ। होस्टेल में जब भी जाल पर वार्तालाप करता था तो मैं हिन्दी में ही लिखता था. अंतर सिर्फ इतना था कि मात्राओं का ध्यान कम रखना पडता था। उदाहरण के तौर पर अगर मैं itni लिखूँ तो इसका मतलब इतनी होता था परंतु अभी इसका मतलब इत्नि बन रहा है।

इसका एक फायेदा ये है कि अब मैं इसके माध्यम से अपनी हिन्दी भाषा के साथ जुडा रह सकता हूँ और यह प्रयोग करने में काफ़ी आसान है। मुझे याद आ रहा है वो दिसंबर के दिन जब मैं एक गैर सरकारी संस्था सिद्ध (Society for Integrated Development of Himalayas) के साथ काम करने गया था। वे अपना सारा पत्र लेखन हिन्दी में करते थे। उनके पास एक अभिकलक भी था। उसमें एक बहुत बडी समस्या यह थी कि उसमें हिन्दी व अंग्रेज़ी भाषा के स्वरों में कोई तालमेल नही था इसलिये उसे प्रयोग करना बहुत दुखदायी था। मुझे Microsoft का धन्यवाद करना चाहिये कि उन्होने हम भारतियों की आशाओं को नज़र में रखते हुए इस तंत्राश का विकास किया है जिससे अब मैं अपनी मात्रभाषा के साथ जुडा रह सकता हूँ। एक अनुरोध यह है कि मैं जहां भी गलत अथवा अनुचित हिन्दी का प्रयोग करुं आप अपनी टिप्पणी में उसे जरूर उजागर करें। आज के लिये बस इतना ही। आज्ञा चाहूँगा। शुभ रात्रि।