सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है।
करता नहीं क्यूँ दूसरों से बातचीत,
देखता हूँ जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है।
ऐ शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत में तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चर्चा घर-घर में है।
वक़्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमान,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है।
खींच कर लाये हैं सब को कत्ल होने की उम्मीद,
आशिकों का आज ज़ुमघट कूचा-ए-कातिल में है।
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है।
करता नहीं क्यूँ दूसरों से बातचीत,
देखता हूँ जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है।
ऐ शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत में तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चर्चा घर-घर में है।
वक़्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमान,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है।
खींच कर लाये हैं सब को कत्ल होने की उम्मीद,
आशिकों का आज ज़ुमघट कूचा-ए-कातिल में है।


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